सभी योगासन सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस के लिए — साधक अंशित

आधुनिक जीवनशैली में सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस की समस्या एक आम समस्या बनती जा रही है। कम्प्यूटर पर ज़्यादा देर तक काम करना, गलत तरीके से बैठना, आरामतलब जिन्दगी, व्यायाम न करने की आदत तथा मानसिक तनाव सर्वाइकल की समस्‍या को बढ़ाने के लिए सबसे अधिक जिम्‍मेदार कारण है। लेकिन योग के जरिये आप सर्वाइकल से आसानी से निजात पा सकते हैं।

सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस क्या है

सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस ऐसी शरीरिक बीमारी है जो गर्दन की हड्डियों के बीच में होने वाली घिसाई से उत्पन्न होती है। इस अवस्था में हड्डी व उपास्थि के बीच विकार आने से गर्दन में बहुत अधिक दर्द उत्पन्न होता है और दिन-प्रतिदिन की क्रियाएँ करने में भी बाधा आती है। सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस की समस्या अधिकांश, 50–60 के उम्र के लोगो में देखी जाती है क्योंकि हड्डियों के घिसने की समस्या उम्र के साथ बढ़ती है। अमेरिकन अकादमी ऑफ़ ओर्थपेडीक सर्जन्स के अनुसार, 85% लोग जो सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस की समस्या से जूझ रहे हैं जो 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोग है। यह समस्या काफी युवाओं में भी देखी जा रही है उनकी आधुनिक जीवन शैली के कारण।

सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस के कारण

आजकल सर्वाइकल पेन का चलन सा हो गया है। अगर किसी के गर्दन में भी दर्द होता है तो उसे लगता है कि उसे लगता है कि ये ‘सर्वाइकल’ है। जबकि, विशेषज्ञों का मानना है कि गर्दन में होने वाला सर्वाइकल हो, ये जरूरी नहीं है। इसके पीछे और भी कई कारण हो सकते हैं। वर्तमान जीवनशैली में सर्वाइकल पेन की सबसे आम वजह गलत पॉश्‍चर है। जैसा कि हम अक्‍सर देखते हैं कि लोग लगातार कुर्सी पर बैठे रहते हैं, कई बार बैठे-बैठे सो जाते हैं। इन गलत पॉश्‍चर की वजह से सर्वाइकल पेन (Cervical Pain) की समस्‍या होने की संभावना बढ़ जाती है। इसके अलावा ज्‍यादातर लोग ऐसे हैं जो घंटो फोन और लैपटॉप नजर जमाए बैठे रहते हैं जो गर्दन में दर्द और सर्वाइकल का कारण बनते हैं। हालांकि, कुछ लोगों का लैपटॉप या मोबाइल पर काम करना मजबूरी भी होती है।

सर्वाइकल पेन (Cervical Pain) के और भी कई कारण हैं। जैसे- बस, ट्रेन और हवाई जहाज की लंबी यात्रा, किसी वजह से बार-बार गर्दन में झटके लगना, आदि इसके सामान्‍य कारण हैं। इससे बचाव के लिए सबसे जरूरी है सही पॉश्‍चर। एक ही पॉश्‍चर में ज्‍यादा देर तक रहने से बचें। इसके साथ ही गर्दन को सही रखने के लिए योग या एक्‍सरसाइज जरूर करें। जो लोग ऑफिस में घंटों गैजेट्स पर समय बिताते हैं या जिन लोगों का काम दिनभर बैठे रहने का है, बढ़ती उम्र के साथ-साथ, सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस की समस्या के उत्पन्न होने के और भी कारण हो सकते हैं। गलत अवस्था में काफी देर तक बैठे रहना, काम के कारण गर्दन पर अधिक तनाव आना, गर्दन व रीढ़ की हड्डी में चोट लगना, स्लिप-डिस्क और मोटापा भी इसके कुछ कारण हैं। यदि पूरे परिवार में स्पॉन्डिलाइटिस की समस्या है तो नई पीढ़ी में भी यह समस्या हो सकती है।

सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस के लक्षण

गर्दन में बहुत अधिक दर्द इस बीमारी का सबसे मुख्य लक्षण है। इसके अलावा कंधो में दर्द, और सिरदर्द भी कुछ लक्षणों में से है।

कभी-कभी सिरदर्द भी हो सकता है, जो आमतौर पर सिर के पीछे, गर्दन के ठीक ऊपर से शुरू होता है, और सिर पर माथे तक जाता है।

दर्द आमतौर पर आता है और चला जाता है, कभी कभी बहुत तेज़ हो जाता है और उसके बाद एकदम शांत हो जाता है।

लगभग 10 में से एक व्यक्ति में लंबे समय तक रहने वाला (पुराना) दर्द उत्पन्न होता है।

अन्य, अधिक गंभीर, लक्षण आमतौर पर केवल तब होते हैं यदि:

स्लिप्ड डिस्क या दूसरी हड्डी पास की नस में चिकोटी काटती है या प्रदाह उत्पन्न करती है (सर्वाइकल रेडिकुलोपैथी के रूप में जाना जाता है)

रीढ़ नलिका (हड्डियां जो चारों ओर से घेरे रहती हैं और नसों की रक्षा करती हैं) संकरी हो जाती हैं, जिससे रीढ़ की हड्डी अंदर से संपीडित हो जाती है (सर्वाइकल माइलोपैथी के रूप में जानी जाती है)

सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस के लिए योगाभ्यास

सरवाइकल स्पोंडिलोसिस के लिए योग एक प्राकृतिक उपाय है। इस प्राचीन ज्ञान का निरंतर अभ्यास आपको लचीला शरीर, शांत मन और जीवन के प्रति एक सकारात्मक नजरिया प्रदान कर सकते हैं। सर्वाइकल पेन और सामान्‍य गर्दन दर्द की समस्या उन लोगों में ज्‍यादा देखने को मिलती है, जो लगातार एक स्‍थान पर बैठकर लिखने पढ़ने या अन्‍य काम में व्‍यस्‍त रहते हैं। इन कारणों से रीढ़ (Spine) की मांसपेशियां और नसें सख्‍त हो जाती हैं। इससे रक्‍तसंचार प्रभावित होने लगता है और दर्द की समस्‍या शुरू होने लगती है। इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए योग की ग्रीवा शक्ति विकासक क्रिया बहुत फायदेमंद है।

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